Vegan Footwear क्यों है भविष्य का फैशन?

Vegan Footwear अर्थात शाकाहारी जूते या कहें कृत्रिम चमड़े से बने जूतों का चलन अब न केवल फैशन बनता जा रहा है बल्कि आने वाले समय की जरूरत भी है।

चमड़े के जूतों को हमेशा से बहुत मजबूत और टिकाऊ माना जाता रहा है। पुराने समय में मृत पशुओं के चमड़े से जूते और अन्य उत्पाद बनाये जाते थे। धीरे-धीरे इनका प्रचलन बढ़ता चला गया और कोई भी चमड़े का सामान जैसे जुते, पर्स, बेग, जैकेट आदि पहनना या अपने पास रखना एक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया।

Vegan Footwear आज की आवशयकता

जैसे जैसे समय के साथ पशुओं के चमड़े से बने विभिन्न उत्पादों विशेषकर जूतों की मांग बढ़ने लगी चमड़ा उत्पादन व्यवसायिक स्तर पर होने लगा। जब भी किसी चीज़ का उत्पादन व्यावसायिक स्तर पर होता है तो उस व्यवसाय को लाभदायक बनाने के लिए उत्पादन भारी मात्रा में करना होता है और अगर उसके अनुरूप मांग न हो तो विज्ञापनों के जरिये उस उत्पाद की मांग पैदा की जाती है। मांग बढ़ती है तो उत्पादन भी बढ़ता है इस तरह यह चक्र चलने लगता है।

चमड़े के उत्पादन सन्दर्भ में यह चक्र बहुत ही घातक है। न सिर्फ इस धरती पर हमारे साथ रहने वाले मासूम प्राणी इसके कारण आजीवन यातनाओं के शिकार होते हैं और अंत में मारे जाते हैं बल्कि चमड़े उत्पादन के लिए बढ़ती पशुओं की संख्या हमारे पर्यावरण को भी असंतुलित बना रही है।

क्या है चमड़े के साथ समस्या?

2018 के अध्ययन के अनुसार अमेरिका में एक चौथाई जूते बनाने के लिए चमड़े का उपयोग किया जाता है। फिर भी यह फुटवियर श्रेणी के कुल वैश्विक प्रभाव का 30 से 80 प्रतिशत है।

चाहे भोजन के लिए या चमड़े के लिए, पशु पालन उद्योग द्वारा उत्सर्जित ग्रीन हाउस गैसेस का मानव निर्मित ग्रीन हाउस गैसों में लगभग 15 प्रतिशत योगदान होता है, जो की जलवायु संकट को और भी बदतर बना रहा है।

दूध के लिए पाली जाने वाली गायें किसी भी अन्य गैर-मानव प्रजातियों की तुलना में सर्वाधिक अधिक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन करती है। यही गायें जब दूध देने लायक नहीं रहती तो इनकी हत्या कर उससे गौमांस और चमड़े का उत्पादन किया जाता है।

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अध्यन के मुताबिक पशु-पालन उद्योग से होने वाला ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन सयुंक्त रूप से सभी वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के बराबर होता हैं।

चमड़े को बनाने में पशुओं का शोषण और अत्याचार तो होता ही है साथ ही साथ चमड़े के प्रोसेसिंग में घातक रसायनों का भी प्रयोग किया जाता है।

चमडे को सायनाइड, आर्सेनिक, क्रोमियम और फॉर्मल्डिहाइड सहित 250 तरह के विभिन्न घातक रसायनों से प्रोसेस किया जाता है, जो जलस्त्रोतों को प्रदूषित करने के साथ-साथ श्रमिकों और स्थानीय समुदायों के लिए बीमारियों के खतरे को भी बढ़ाते हैं।

भारत में कानपुर, उत्तरप्रदेश में सर्वाधिक चमड़े प्रोसेसिंग की इकाईयां है। इन इकाईयों ने कितनी बुरी तरह जन जीवन और पर्यावरण को प्रभावित किया है उसे आप यहाँ देख सकते हैं

In Pictures: The toxic cost of Kanpur’s leather industry

चमड़े के साथ दूसरी समस्या यह है कि इससे बने उत्पाद अनुपयोगी होने के बाद प्रकृति में आसानी से नष्ट नहीं होते हैं। पुरातत्वविदों ने 2010 में आर्मेनिया की एक गुफा में 5,500 साल पुराने चमड़े के जूते की खोज की थी।

अनुपयोगी होने के बाद लैंडफिल में दबा दिए गए जूते भी उनमें उपस्थित जहरीले रसायनों के कारण लम्बे समय तक पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचते रहते हैं और आस-पास रहने वाले मनुष्यों के साथ साथ अन्य प्राणियों के लिए भी घातक सिद्ध हो सकते हैं।

भारत क्यों है चमड़ा उद्योग में अव्वल?

भारत दुनिया में सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और यही कारण है कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गौमांस निर्यातक भी है। दूध और गौमांस में अव्वल होने के कारण भारत चमड़े का भी प्रमुख उत्पादक और निर्यातक देश है। यह विडंबना ही कही जा सकती है कि दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ने वाला देश आज हिंसक उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादन और निर्यात करने वाला देश बन गया है।

कैसे हम इस विनाशकारी और क्रूर उत्पाद से बच सकते हैं?

चमड़े सर्वाधिक उपयोग जूते चप्पल बनाने में किया जाता है। भारत में न सिर्फ देश की विशाल आबादी के लिए जूते चप्पल बनाने के लिए पर्याप्त चमड़े का उत्पादन होता है बल्कि विश्व के कई देशों में भारत चमड़े का निर्यात भी करता है।

देश में लाखों लोगो को चमड़ा और इससे इससे बनने वाले उत्पादों के उद्योगों से रोज़गार मिला हुआ है इसलिए सरकार भी इस हिंसक, प्रदूषणकारी और स्वस्थ्य नाशक उद्योग को हतोत्साहित नहीं करती है लेकिन एक संवेदनशील नागरिक होने के नाते हमारा यह कर्त्तव्य बनता है कि हम चमड़े और इससे बने उत्पादों को अपने जीवन में काम में न लें।

क्या है विकल्प चमड़े का?

अब यह और ज्यादा लम्बे समय तक संभव नहीं हो सकता कि हामरी पृथ्वी इंसानों द्वारा किये जा रहे अप्राकृतिक और पर्यावरण नाशक कार्यों को सहन कर सकेगी। अब समय आ गया है की हम अपने जीवन शैली में इस तरह के बदलाव करें जो पर्यावरण अन्य प्राणियों के लिए घातक साबित न हो।

अधिकांश लोग अपने जूते और चप्पल के रूप में ही चमड़े का उपयोग करते हैं इसलिए इसका सबसे अच्छा विकल्प है Vegan Footwear . जैसे जैसे चमड़े के पीछे की क्रूरता को लोग जान और समझ रहे हैं , इसके विकल्प को भी तलाश रहे हैं।

आज भारत और विश्व की सभी अग्रणी फुटवेअर बनाने वाली कंपनियां vegan footwear का विकल्प अपने ग्राहकों को दे रही है।

Online Shopping वेबसाइट पर भी leather free footwear के बहुत सारे विकल्प उपलब्ध है।

भारत और पूरे विश्व में Vegan Lifestyle के बढ़ते प्रचलन के कारण भी leather free vegan footwear एक फैशन बनता जा रहा है। मुझे पूरा विशवास है कि वह दिन भी जल्द ही आएगा जब आम लोग चमड़े के उत्पादों का बहिष्कार कर अपने जीवन में क्रूरता रहित विकल्प अपनाने पर जोर देंगे।

क्या होता है वीगनिस्म (Veganism), कौन होते हैं वीगन (Who are Vegans)?

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