क्या होता है वीगनवाद (Veganism), कौन होते हैं वीगन (Who are Vegans)?

शाकाहारी और वीगन(vegans) में क्या अंतर होता है?

वैसे तो शाकाहारी भोजन का मतलब ही होता है शाक+आहार अर्थात जो भोजन हमें सिर्फ पेड़ पौधों से प्राप्त हो। अब शाकाहारी भोजन में पशु-दूध और उससे बने पदार्थ, और शहद को भी सम्मिलित किया जा चुका है जो कि शाकाहारी भोजन की परिभाषा से बिलकुल भी मेल नहीं खाता।

बहुत सी जगह इससे भी एक कदम आगे जा कर अंडे और मछली को भी शाकाहार के रूप में परिभाषित करने की असफल कोशिश की जा चुकी है। ऐसी कोशिश सिर्फ एक छलावा मात्र है।

चूँकि शाकाहार अपनी परिभाषा से भटक गया है इसलिए एक नए शब्द की जरुरत महसूस हुई। वर्ष 1944 में डोनाल्ड वाटसन (Donald Watsan ) ने महसूस किया कि एक ऐसे शब्द की जरूरत है जिसे सिर्फ वनस्पति से प्राप्त भोजन के लिए प्रयोग किया जाए।

उन्होंने अंग्रेजी के वेजीटेरियन (vegetarian) शब्द के प्रथम 3 और आखरी 2 अक्षरों veg +an को मिला कर vegan (वीगन)शब्द की रचना की।

कौन होते हैं वीगन(Who are Vegans)?

वीगन अब उन्हें कहा जाता है जो न केवल अपने खान पान में अपितु अपने जीवन में किसी भी तरह के पशुओं से प्राप्त चीज़ों का उपयोग नहीं करते हैं।

खाने में सिर्फ वनस्पति से प्राप्त भोजन ही करते हैं। पशुओं से प्राप्त दूध, शहद और अंडे का प्रयोग भी नहीं करते। न ही वह चमड़े, रेशम, उन इत्यादि का प्रयोग करते हैं, न ही चिडयाघर देखने जाते हैं। अपने घर पर एक्वेरियम और कोई भी पशु को बंदी बनाने(पालने) से भी पूरी तरह परहेज करते हैं। वीगन लोग किसी भी पशु की सवारी के भी पूरी तरह से विरोध में होते हैं।

क्या होता है वीगनवाद (Veganism)?

वीगनवाद की मूल धारणा है कि पशुओं का अपना स्वतंत्र अस्तित्व होता है, और इस धरती पर उनकी स्वतंत्रता का पूर्ण सम्मान किया जाना चाहिए।

जब भी हम किसी पशु से कुछ चाहते हैं तो वह हमे उससे छीनना पड़ता है क्योकि वह हमारे प्रयोग के लिए नहीं होता है। जैसे- यदि हमें किसी पशु का दूध चाहिए तो वह दूध कोई भी पशु हमारे लिए नहीं बनाते बल्कि वह दूध उसके नवजात बच्चे के लिए होता है। यदि वह दूध हमे लेना है तो हमें उस बछड़े का हक़ मार कर लेना पड़ेगा जो कि पशुओं के मूलभूत अधिकारों का सीधा हनन है।

इसके अतिरिक्त दूध उत्पादन में और भी कई तरह की क्रूरताएं होती है जिसके बारे में आप विस्तार से यहाँ पढ़ सकते हैं – दूध छोड़, दया जोड़

Go Vegan

कैसे होती है पशु उद्योग(animal agriculture industry) में पशुओं के साथ क्रूरता?

इसी तरह शहद, जो कि मधुमक्खियों का भोजन होता है। अंडे, जो मुर्गियों की वंश वृद्धि के लिए होते हैं। चमड़ा, जिसके लिए जानवरों की निर्ममता से हत्या की जाती है। ऊन, जो भेड़ों के बाल होते हैं। रेशम के लिए लाखों कीड़ों को खौलते पानी में डाल कर मार दिया जाता है। इस तरह के सभी पशु-उत्पाद पशुओं को किसी न किसी रूप में प्रताडित करने से ही प्राप्त होते हैं।

पशु-उत्पादों की भारी मांग को पूरा करने के लिए पशुओं से कोई भी उत्पाद प्राप्त करने हेतु आजकल पशुओं की खेती (animal agriculture) की जाती है और इन उत्पादों का व्यावसायिक उत्पादन किया जाता है।

जब किसी भी चीज का व्यवसाय कर उसका व्यावसायिक उत्पादन किया जाता है तो यहाँ पर लाभ कमाना मुख्य उद्देश्य हो जाता है, क्योंकि बिना मुनाफा कमाए कोई भी व्यवसाय या उद्योग सफल नहीं हो सकता।

जब लाभ कमाना ही मुख्य उद्देश्य होता है तो यहाँ पर पशुओं की पीड़ा गौण हो जाती है और उनके अधिकारों की परवाह किये बिना उनसे अधिक से अधिक उत्पाद प्राप्त करने की कोशिश रहती है।

इस कोशिश में पशुओं पर जुल्म भी होता है और उन्हें प्रताड़ित भी किया जाता है। यहाँ तक कि पशु-उत्पाद से जुड़े उद्योगों में इस तरह की प्रताड़नाओं को मानक प्रक्रिया(industries’ stranded practice) घोषित किया हुआ है।

जैसे डेयरी उद्योग में नर बछड़ों की हत्या या उन्हें सड़कों पर आवारा छोड़ना और अंडा उद्योग में नर चूज़ों को पैदा होने के कुछ ही घंटों में जिन्दा ग्राइंडर में डाल कर पीस दिया जाता है और उससे प्राप्त मांस से अन्य उत्पाद बनाये जाते हैं। अंडा उद्योग की क्रूरताओं को जानने के लिए यहाँ देखें – अंडे उद्योग की क्रूरता , egg industry cruelty

पशुओं जैसे घोडा और हाथी को सवारी के लायक बनाने के लिए भी उन्हें बचपन से ही तैयार किया जाता है। हाथी जैसे जंगली जानवर को वश में करना आसान नहीं होता इसलिए उसको बचपन में ही अपनी माँ से अलग कर दिया जाता है और ट्रेनिंग के नाम पर जंजीरों से बांध कर मारपीट कर वश में किया जाता है, ताकि बड़ा होने तक वह अपना प्राकृतिक स्वाभाव खो दे और इंसान के वश में रहे।

कुत्तों को अपने घरों में पालने की बढ़ती हुई प्रवृत्ति के कारण इसने भी एक उद्योग का रूप धारण कर लिया है। मांग के अनुसार कुत्ते के बच्चे पैदा करने के लिए puppy mills में क्रूरता पूर्वक कुत्तों को बच्चे पैदा करने की मशीन की तरह प्रयोग किया जाता है। puppy mills की सच्चाई इस वीडियो में देखें।

रंग बिरंगी मछलियों को अपने घर में पालने के बढ़ते चलन ने इसे भी एक उद्योग में बदल दिया है। इस तरह एक्वेरियम उद्योग भी अन्य पशु-उत्पादों के उद्योगों की तरह फल फूल रहा है जहाँ मछलियों के जीवन के साथ क्रूरता पूर्वक छेड़छाड़ की जाती है लेकिन एक्वेरियम के दीवाने लोगों को इसमें छिपी क्रूरता दिखाई नहीं देती क्योंकि इसमें होने वाली क्रूरताओं को उद्योग की एक मानक प्रक्रिया (industries’ stranded practice) घोषित किया हुआ है।

आजकल वीगन भोजन बहुत पसंद किया जाने लगा है और इसे बनाना और खाना न केवल हमारे स्वास्थ्य बल्कि हमारे पर्यावरण के लिए भी बहुत फायदेमंद हैं। अगर आप अभी भी दुविधा में हैं कि बिना दूध, दही, पनीर या अंडे के भोजन कैसे बना सकते हैं तो यहाँ आपको 100 mouth-watering plant-based recipes मिल जायेगी

रंगीन फिश एक्वेरियम की बदरंगी दुनिया!

पशुओं के प्रति होने वाली इन सभी दिल दहलाने वाली क्रूरताओं से विचलित हो कर जो लोग अपने जीवन में किसी भी तरह के पशु-उत्पादों का पूर्णत: निषेध करते हैं उन्हें वीगन कहा जाता है। हिंदी में भी इसके लिए एक शब्द गढ़ा गया है निरवद्य। इस शब्द की उत्पत्ति के बारे में आप यहाँ विस्तार पूर्वक पढ़ सकते हैं- निरवद्य